Biology GK जीवधारियों का वर्गीकरण

raviraj nag 3
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जीव विज्ञान (Biology gk ) विज्ञान की वह शाखा है , जिसके अंतर्गत जीवधारियों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। 

जीवधारियों की उत्पत्ति उनका विकास उनकी रचना , वातावरण का उन पर प्रभाव उनकी मृत्यु सभी विषयो का अध्ययन किया जाता है।

जीव विज्ञानं को एक शाखा के रूप में स्थापित करने का श्रेय अरस्तु को जाता है। 

अरस्तु को जीव विज्ञानं का जनक (Father of Biology ) कहा जाता है। लेकिन Biology शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1801 में लैमार्क (फ्रांस ) और ट्रेविनेरस (जर्मनी ) नामक दो वैज्ञानिक ने किया था। 

वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान जीव विज्ञानं की दो शाखा है। 

वनस्पति विज्ञान – इसके अंतर्गत वनस्पतियो का अध्ययन किया जाता है। वनस्पति  विज्ञान का जनक theophrastus (थिओफ्रेस्टस ) को कहा जाता है। इनकी पुस्तक Historia प्लांटरूम है। 

प्राणी विज्ञान – इसके अंतर्गत जन्तुओ का अध्ययन किया जाता है। प्राणी विज्ञान का जनक अरस्तु को कहा जाता है। इनकी पुस्तक Historia Animalium है। 

जीवधारियों का वर्गीकरण 

जीवधारियो के वर्गीकरण (Biology GK in Hindi )   को वैज्ञानिक आधार जॉन रे ने प्रदान किया। 

लेकिन प्रमुख योगदान केरोलस लीनियस (1708 -1778 ) का है।  लीनियस ने अपनी पुस्तक जेनेरा प्लान्टेरम ,सिस्टेमा नेचुरी ,क्लासेस प्लेन्टेरम ,फिलॉसोफिए बॉटनिका  में वर्गीकरण का विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। 

इसलिए करौलुस लीनियस को वर्गिकी का पिता कहा जाता है। 

द्वी जगत वर्गीकरण का स्थान R .H .Whittaker द्वारा 1969 में 5 जगत प्रणाली ने ले लिया। 

इसके अनुसार जीवो को 5 जगत (Kingdom ) में बाँटा गया –

  1. मोनेरा (Monera ) – इसमें प्रोकैर्योटिक जीव जीवाणु ,सायनोबैक्टेरिआ ,आर्किबैक्टीरिया ,आते है। 
  2. प्रॉटिस्टा (Protista)- इसमें एककोशिकीय जलीय उकेरियोटिक जीव आते है। 
  3. पादप (Plantae)-इसमें शैवाल ,मॉस ,पुष्पीय ,आपुष्पीय बीजीय पौधे आते है। 
  4. कवक (Fungi)- यह मृतोपजीवी होते है इसकी कोशिका भित्ति काइटिन की बानी होती है।  
  5. एनिमेलिए (Animalia)- हाईड्रा ,जेलीफिश,कृमि ,सितारा ,सरीसृप ,उभयचर,पक्षी ,स्तनधारी एते है। 

जीवो के नामकरण की द्विनाम पद्धति

सन 1753 में केरोलस लीनियस ने जीवो के नामकरण की द्विनाम पद्धति को प्रचलित किया। 

प्रत्येक जीवो का नाम लेटिन भाषा के दो शब्द पहला वंश नाम और दूसरा जाती नाम से मिलकर बनता है। 

इसके बाद वैज्ञानिक का नाम लिखा जाता है जैसे –

मानव का – होमो सेपियन्स लीन (Homo Sapiens Linn )

होमो उस वंश का नाम हे। 

जिसकी एक जाती सेपियन्स है। 

लिन उस लीनियस वैज्ञानिक का न है। 

जीवधारिओ का वैज्ञानिक नाम in Biology GK

1 मनुष्य Homo Sapiens
2 मेंढक Rana Tigrina
3 बिल्ली Felis domestica
4 कुत्ता Canis familiaris
5 गाय Bos indicus
6 मक्खी Musca indicus
7 आम Mangifera indica
8 धान Oryza sativa
9 गेहूँ Triticum aestivum
10 मटर Pisum sativum
11    
12 चना cicer arietinum
13 सरसों Brassica campestris
14    
15    

कोशिका एवं कोशिका संरचना biology Gk in Hindi

cell (कोशिका ) – कोशिका जीवो की कार्यात्मक इकाई है। यह पारगम्य कला से घिरी रहती है। इसमें स्वजनन (self reproduction ) की छमता होती है। 

 discovery of cell (कोशिका की खोज ) – कोशिका की खोज 1665 में रोबर्ट हुक (ब्रिटिश ) ने की। इसका प्रकाशन उन्होंने माइक्रोग्राफिआ नामक पुस्तक में किया। 

महत्वपूर्ण खोज

रोबर्ट ब्राउन ने 1831 में केन्द्रक (Nucleus ) की खोज की। 

जीवद्रव्य (Protoplasm ) की खोज डुजारडिन ने की। 

सन 1839 में पुरकिंजे ने कोशिका के अंदर पाय गये पदार्थ को जीवद्रव नाम दिया। 

स्लाइडेन ने 1838 में कहा की पादपों का शरीर सूक्ष्म कोशिकाओ का बना है। 

श्वान ने 1839 में बताया की जन्तुओ का शरीर भी सूक्ष्म कोशिकाओ का बना है। 

विरचो ने 1855 में बताया की नई कोशिकाओ का निर्माण पहले से मौज़ूद कोशिकाओ से होता है। 

मैक्स सुल्ज ने  कहा कि  कोशिका प्रोटोप्लास्म का पिण्ड है जिसमे एक केन्द्रक होता है 1861 मेे । 

स्ट्रासबर्गर ने कहा की केन्द्रक पैतृक वंशागति में भाग लेता है 1884 में । 

कैमिलो गोल्जी ने 1898 में गॉल्जीकोय की खोज की। 

केन्द्रिका की खोज 1774 में फेलिक फोंटाना ने की। 

फ्लेमिंग ने  क्रोमेटिन और कोशिका विभाजन के बारे में जानकारी दी 1880 में । 

वॉल्डेयर ने 1888 में गुड़सूत्र Chromosome का नामकरण किया। 

स्चिमपर ने 1883 में पर्णहरित Chloroplast का नामकरण किया।

सोमेटोप्लास्म और जर्मप्लास्म के बिच अंतर वीज़मैन ने 1892 में बताया।

पैलेड ने 1955 में रइबोसोम की खोज की।

 लाईसाेेसोम की खोज 1958 में डी डवे ने की। 

तारककाय की खोज 1888 में बोवेरी ने की। 

माइटोकोण्ड्रिआ की खोज 1890 में रिचर्ड ऑल्टमेन ने की और बायो ब्लास्ट नाम दिया। 

बेंडा ने 1897 -98 में माइटोकोण्ड्रिआ नाम दिया। 

 

कोशिका सिद्धान्त Biology GK in Hindi

cell Theory – वनस्पति वैज्ञानिक स्लाइडेन और जन्तु वैज्ञानिक स्वान ने मिलकर कोशिका सिद्धान्त दिया। 

जीव का शरीर कोशिकाओ से बना होता है जीव की उत्पत्ति कोशिका से होती है। 

अपवाद – Virus विषाणु कोशिका सिद्धान्त का अपवाद है इसमें कोशिका नहीं होती है। 

कोशिका के प्रकार in Biology GK

यह दो (2 ) प्रकार की होती है –

1 – प्रोकैरीयोटिक कोशिका – यह प्रारंभिक कोशिका होती है। इसमें केन्द्रक नहीं होता है। इनका आकर 1µ से 10µ तक होता है। इसमें DNA द्वारा निर्मित गुड़सूत्र कोशिका द्रव में होते है। इसे नूक्लिओइड कहते है। 

उदहारण – जीवाणु कोशिका 

2 – यूकेरियोटिक कोशिका – यह पूर्ण रूप से विकसित होती है। यह सभी पौधे और जन्तुओ में पाई जाती है। इसमें केन्द्रक होता है। 

कोशिकाओ में अंतर in Biology GK

  प्रोकैरिओटिक कोशिका यूकैरिओटिक कोशिका
इसमें अविकसित केन्द्रक होता है। इसमें पूर्ण विकसित केन्द्रक होता है।
2 केन्द्रक कला तथा केन्द्रिका नहीं होती। केन्द्रक कला और केन्द्रिका होती है।
3 इसमें समसूत्री कोशिका विभाजन नहीं होता। इसमें समसूत्री कोशिका विभाजन होता है।
4 श्वसन तंत्र प्लाज़्मा झिल्ली में होता है। श्वसन तंत्र माइटोकोण्ड्रिआ में होता है।
5 हरित लवक नहीं होता। हरित लवक होता है।
6 राइबोसोम 70s प्रकार का होता है। राइबोसोम 80s प्रकार का होता है।
7 इसमें 9 + 2 व्यवस्था नहीं होती। 9 + 2 व्यवस्था होती है।
8 रिक्तिका नहीं होती रिक्तिका होती है।
9 लैंगिक जनन नहीं होता। लैंगिक जनन होता है।
10 केवल एक गुड़सूत्र होता है। इसमें एक से अधिक गुड़सूत्र होता है।
Biology GK in Hindi

कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm ) in Biology GK

जीवद्रव्य का वह भाग जो कोशिका भित्ति और केन्द्रक के बीच होता है कोशिकाद्रव्य कहलाता है। इसमें कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ होते है। 

अन्तः प्रदव्य जालिका – यह कोशिका द्रव्य में होती है। जो लइको प्रोटीन की बानी होती है। 

A – चिकनी अन्तः प्रदव्य जालिका -इसकी झिल्ली चिकनी होती है। इसमें राइबोसोम नहीं होते। यह लिपिड स्त्राव के लिए उत्तरदायी होती है। 

B – खुरदुरी अन्तः प्रदव्य जालिका -इसके बहरी झिल्ली के ऊपर छोटे कण होते है जिसे राइबोसोम कहते है। यह प्रोटीन संस्लेशण के लिए उत्तरदायी होती है। 

राइबोसोम (Ribosome )

यह अन्तः प्रदव्य जालिका की सतह पर सटे रहते है या फिर कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते है। यह प्रोटीन और RNA की बनी होती है। यह प्रोटीन संस्लेशण में भाग लेते है। 

गॉल्जीकोय – यह जीवाणु एवं नील हरित शैवाल ,स्तनधारिओ के लाल रुधिर कणिका में नहीं पाए जाते है। 

लाइसोसोम (Lysosome ) in biology gk

इसमें ऐसे anzymins होते है जिनमे जीवद्रव्य को नस्ट कर देने की छमता होती है इसे आत्महत्या की थैली कहते है। यह जीवाणु एवं विषाणु से रक्षा करता है। 

माइटोकॉण्ड्रिआ -यह कोशिका द्रव्य में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण रचना है यह कोशिका द्रव्य में बिखरी रहती है। ऑल्टमैन ने इसे बायोब्लास्ट और बैंडा ने माइटोकॉण्ड्रिआ नाम दिया। इसे ऊर्जा उत्पन करने के कारण कोशिका का ऊर्जा  गृह (Power house of the cell) कहते है 

लवक (Plastid )

लवक  पादप कोशिकाओ में होते है और  कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते है। 

यह तीन प्रकार के होते है। 

1 अवर्णी लवक – यह पौधे के उन भाग में पाए जाते है जो सूर्य के प्रकाश से वंचित रहते है। जैसे -जड़ 

2 वर्णी लवक – यह रंगीन होते है जो लाल ,नारंगी ,और पीले रंग के होते है। जैसे – पुष्प ,फलभित्ति ,बीज। 

3 हरित लवक – इसी की वजह से पौधे में Chlorophyll की  मदद से प्रकाश संस्लेशण की क्रिया होती है इसलिए हरित लवक को कोशिका का रसोई घर कहते है। इसमें केरोटीन और जेंथोफिल वर्णक भी होते है। 

तारककाय – यह जंतु कोशिका में पाया जाता है।

Biology GK in Hindi

केन्द्रक (Nucleus ) in biology gk

केन्द्रक की खोज 1831 में रोबर्ट ब्राउन ने की थी। यह कोशिका द्रव्य के बीच में होती है। इसके चारो और की झिल्ली को केन्द्रक झिल्ली कहते है। इसके अंदर के द्रव्य  केन्द्रक द्रव्य कहते है जिसमे धागो की जाल जैसी रचना होती है उसको क्रोमेटिन जालिका कहते है। यह DNA एवं प्रोटीन की बानी होती है 

कोशिका विभाजन के समय क्रोमेटिन जालिका के धागे छोटी मोटी रचना में बदल जाते है इसे गुड़सूत्र कहते है।  केन्द्रक कोशिका की रक्षा  करता है और कोशिका विभाजन में भी भाग लेता है। 

जीव गुड़सूत्र
एस्केरिस 2
मच्छर 6
मटर 14
मक्का 20
मक्खी 12
प्याज 16
टमाटर 24
नींबू 18 ,36
मेंढक 26
बिल्ली 38
चूहा 40
गेहू 42
खरगोश 44
आलू 48
मनुष्य 46
तम्बाकू 48
घोड़ा 64
कुत्ता 78
टेरिडोकाइटस 1300 -1600
biology gk in hindi

कोशिका विभाजन in biology gk

इसका प्रमुख कार्य एक कोशिका से अनेक संतति कोशिका को जन्म देना है यह कोशिका नवीन अंगो की वृद्धि एवं लैंगिक अलैंगिक जनन में भूमिका निभाती है। 

यह दो प्रकार की होती है –

1 समसूत्री विभाजन (Mitosis )

2 अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis )

  समसूत्री विभाजन अर्द्धसूत्री विभाजन
1 यह कायिक कोशिकाओ में होता है यह केवल जनन कोशिकाओ में होता है
2 1 चरण में होता है। 2 चरण में होता है।
3 इसमें क्रॉसिंग ओवर नहीं होता। इसमें क्रॉसिंग ओवर होता है।
4 गुड़सूत्र के जोड़े नहीं बनते। गुड़सूत्र के जोड़े बनते है।
5 अर्द्ध गुड़सूत्र लम्बे व पतले होते है। अर्द्ध गुड़सूत्र छोटे व मोटे होते है।
6 2 संतति कोशिकाओ का निर्माण होता है। 4 संतति कोशिकाओ का निर्माण होता है।
biology gk
महत्वपूर्ण तत्य
  • फार्मर एवं मूरे ने सबसे पहले अर्द्धसूत्री (Meiosis )शब्द दिया था।
  • whitemann ने सबसे पहले 1887 में कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis ) शब्द दिया था.
  • स्कैनडर ने सबसे पहले केन्द्रक विभाजन शब्द दिया था।
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