Motion ( गति ) General Knowledge

raviraj nag
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Motion Gk in Hindi

motion gravitattional force 2020
Gk motion in Hindi

यदि किसी वस्तु की स्थिति किसी स्थिर वस्तु के सापेक्ष समय के साथ बदलती है तो उसे कहते है – गति अवस्था

समय के साथ स्थिर वस्तु के सापेक्ष स्थिति नहीं बदलती है उसे कहते है – विराम अवस्था

वस्तु द्वारा किसी समय अंतराल में तय किये गए मार्ग की लम्बाई को कहते है – दूरी

दूरी राशि है – अदिश

दूरी सदैव होती है – धनात्मक

वस्तु की अंतिम स्तिथि तथा प्रांरम्भिक स्थिति के बीच की न्यूनतम दुरी को कहते है – विस्थापन

विस्थापन राशि है – सदिश

इसमें परिमाण एवं दिशा दोनों होते है।

विस्थापन का मान – धनात्मक , ऋणात्मक या शून्य होता है।

कोई वास्तु इकाई समय में जितनी दूरी तय करती है उसे कहते है – चाल

चाल राशि है – अदिश

इसका SI मात्रक – मीटर प्रति सेकंड (m/s )

Motion Gk in Hindi

कोई वस्तु इकाई समय में किसी निश्चित दिशा में जितनी दूरी तय करती है उसे कहते है – वेग

वेग राशि है – सदिश

इसका SI मात्रक – मीटर प्रति सेकंड (m/s )

वेग होता है – धनात्मक , ऋणात्मक , या शून्य

Average Speed (औसत चाल)

प्रथम – जब वस्तु भिन्न भिन्न चालो से समान दूरी तय करती है उसे औसत चाल कहते है

यदि कोई वस्तु किसी दूरी को V1 चाल से और उसके बाद उतनी ही दूरी V2 चाल से तय करती है तो सम्पूर्ण यात्रा में उसकी औसत चाल होगी – 2 V1V2/V1 + V2

जब वस्तु भिन्न भिन्न चालो से समान समय तक चलती है –

यदि यात्रा के पहले आधे समय में कार की चाल V1 तथा यात्रा के दूसरे आधे समय में कार की चाल V2 हो तो सम्पूर्ण यात्रा में औसत चाल = V1 +V2 / 2

Motion Gk in Hindi

किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को उस वस्तु का – त्वरण कहते है

इसे किस्से सूचित करते है – a

इसका SI मात्रक – मीटर प्रति वर्ग सेकंड (m / s2 )

यदि वस्तु के वेग में बराबर परिवर्तन हो रहा हो तो त्वरण होगा – एकसमान

वस्तु के वेग का परिमाण समय के साथ बढ़ रहा हो तो त्वरण होगा – धनात्मक

और वेग का परिमाण घट रहा हो तो त्वरण होगा – ऋणात्मक और इसे मंदन भी कहते है।

एकसमान त्वरित गति के लिए गैलिलिओ के समीकरण

  1. v = u + at
  2. v2 = u2 + 2as
  3. s = ut + 1/2 at2
  4. sn = u + 1/2 a( 2n-1 )

जब कोई वस्तु किसी वृताकार मार्ग में गति करती है तो उसकी गति को कहते है – वृतीय गति

यदि एकसमान चाल से गति करती है तो उसकी गति को कहते है – समरूप या एकसमान वृतीय गति

एकसमान वृतीय गति त्वरित होती है , क्यूंकि वृत के प्रेत्यक बिंदु पर वेग की दिशा बदल जाती है।

कोणीय वेग (Angular Velocity) Motion

वृत्ताकार मार्ग पर गतिशील कण को वृत केंद्र से मिलाने वाली रेखा एक सेकंड में जितने कोण से घूम जाती है , उसे उस कण का कोणीय वेग कहते है।

इसे ग्रीक अक्षर w ओमेगा से सूचित करते है।

ω = θ/ t 

= rad /sec 

ω = 2πn 

यदि वृत्ताकार मार्ग की त्रिज्या r है , और कण 1 सेकंड में n चक्कर लगाता है। 

तो 1 चक्कर में चली गई दूरी = व्रत्त की परिधि  X n = 2 πrn 

रेखीय वेग = कोणीय वेग X त्रिज्या

प्रछेप्य गति (Proectile Motion)

जब कोई वस्तु छेतीज से कोई कोण बनाते हुए ऊर्ध्वाधर तल में प्रछेपित किया जाता है तो उसका पथ परवलय होता है , पिंड की गति प्रछेप्य कहलाती है।

पिंड को फेंकने तथा वापस पृथ्वी पर गिरने के बीच के समय को उड्डयन काल कहते है।

T = 2usinθ / g

जहाँ u प्रारंभिक वेग है।

Height ऊंचाई  h = u2sin2θ / 2g

पिंड अपने उड्डयन काल में जितनी छैतिज दूरी तय करता है , उसे परास कहते है।

R = u2sin2θ / g

न्यूटन के गति नियम (Newton laws Motion)

गति के नियम को सबसे पहले सर आइजक न्यूटन ने 1687 में बताया।

प्रिन्सिपिया पुस्तक में प्रतिपादित किया था।

प्रथम नियम – जब कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम की अवस्था में ही रहेगी। यदि वह एकसमान गति से किसी सीधी रेखा में चल रही हो , तो वह वैसी ही चलती रहेगी। जब तक उसपर कोई बहरी बल लगाकर उसकी अवस्था में परिवर्तन न किया जाय।

वस्तुओ की प्रारंभिक अवस्था में स्वतः परिवर्तन नहीं होने की प्रवति को जड़त्व कहते है।

इसलिए न्यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम भी कहते है।

उदहारण –

  • रूकी हुई गाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उसमें बैठे यात्री पीछे की और झुक जाते है।
  • चलती हुई गाड़ी के अचानक रूकने पर बैठे यात्री आगे की और झुक जाते है।
  • गोली मारने से कांच में गोल छेद हो जाता है , लेकिन पत्थर मारने पर कांच टुकड़े टुकड़े हो जाता है।
  • हथोड़े को हत्थे में कसने के लिए हत्थे को जमीन पर मारते है।
  • कम्बल को हाथ से पकड़कर डंडे से पीटने पर धूल के कण झड़कर गिर पड़ते है।
  • पेड़ की टहनियों को हिलाने से उसमे फल टूटकर निचे गिर पड़ते है।
  • Newtons Motion Gk in Hindi

द्वितीय नियम

वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है। तथा संवेग परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में ही होता है।

यदि किसी m द्रव्यमान की वस्तु F बल आरोपित करने से उसमे बल की दिशा में a त्वरण उत्पन होता है , तो

द्वितीय नियम के अनुसार

F = ma

यदि वस्तु में बाहरी बल न लगाया जाये ,तो वस्तु में त्वरण उत्पन्न नहीं होगा।

त्वरण त्वरण का मान शून्य है , तो इसका अर्थ है की वस्तु नियत वेग से गतिमान है या विराम अवस्था में है।

बल के मात्रक – SI पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन (N – Newton ) है।

गुरत्वीय बल = द्रव्यमान X गुरुत्वीय त्वरण

1 किलोग्राम भार = 9.8 न्यूटन

w = mg

संवेग (Momentum-P)

किसी गतिमान वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुडनफल को वस्तु का संवेग कहते है।

संवेग = द्रव्यमान X वेग

p = mv

संवेग सदिश राशि है।

मात्रक = किलोग्राम मीटर / सेकंड (kg. m /s )

आवेग (Impulse-J)

यदि कोई बल किसी वस्तु पर कम समय तक कार्यरत रहे तो बल और समय अंतराल के गुणनफल को उस वस्तु का आवेग कहते है।

आवेग = बल X समय अंतराल

J = Ft

उदहारण –

  • सामान वेग से आती हुई क्रिकेट गेंद एवं टेनिस गेंद में से टेनिस गेंद को केंच करना आसान होता है।
  • क्रिकेट खिलाडी तेजी से आती हुई गेंद को कैच करते समय अपने हाथो को गेंद के वेग की दिशा में गतिमान कर लेता है, ताकि चोट कम लगे।
  • मिट्टी के फर्श पर गिरने पर सीमेंट से बने फर्श पर गिरने की तुलना में कम चोट लगती है।
  • Motion gk in Hindi

तृतीय नियम

प्रेत्यक क्रिया के बराबर ,परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। अर्थात दो वस्तुओ की क्रिया में एक वस्तु जितना बल दूसरी वस्तु पर लगाती है , दूसरी वस्तु भी विपरीत दिशा में उतना ही बल पहली वस्तु पर लगाती है। इसमें से एक बल को क्रिया व दूसरे बल को प्रतिक्रिया कहते है।

उदहारण –

  • बन्दुक से गोली छोड़ते समय पीछे क और झटका लगना।
  • नाव के किनारे पर से जमीन पर कूदने पर नाव पीछे हट जाती है ।
  • नाव खेने के लिए बांस से जमीन को दबाना।
  • कुआँ से पानी खींचते समय रस्सी टूट जाने पर व्यक्ति का पीछे गिर जाना।
  • ऊंचाई से कूदने पर चोट लगना।
  • रॉकेट का आगे बढ़ना।
  • Motion Gk in Hindi

संवेग संरक्षण (conservation of Momentum)

जब एक या एक से अधिक वस्तुओ के निकाय पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा हो ,तो उस निकाय का कुल संवेग नियत रहता है ,अर्थात संरक्षित रहता है। इस कथन को ही संवेग संरक्षण का नियम कहते है।

अर्थात एक वस्तु में जितना संवेग परिवर्तन होता है ,दूसरी में उतना ही संवेग परिवर्तन विपरीत दिशा में हो जाता है।

जब कोई वस्तु पृथ्वी की और गिरता है तो उसका वेग बढ़ता जाता है, जिससे उसका संवेग भी बढ़ता जाता है।

उदहारण –

  • जब बराबर संवेग वाली दो गेंदे आपस में टक्कर मारती है तो गेंदे अचानक रूक जाती है।
  • बन्दुक चलाने वाला बन्दुक को कंधे से दबाकर रखता है ताकि बन्दुक एवं शरीर एक हो जाय।

बल (Force )

जो किसी वस्तु की प्रारंभिक अवस्था यानि विराम की अवस्था या एक सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था को परिवर्तित करने का प्रयास करता है।

SI मात्रक – न्यूटन (N )

CGS मात्रक – डाइन

1 N = 105 डाइन

बल 4 प्रकार के होते है।

1 – गुरुत्वाकर्षण बल

ब्रम्हाण में प्रेत्यक कण दूसरे कण को केवल अपने द्रव्यमान के कारण ही आकर्षण करते है। तथा किसी भी दो कणो के बीच इस प्रकार के आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण कहते है।

  1. गुरुत्वाकर्षण बल
  2. विधुत चुम्बकीय बल
  3. दुर्बल बल
  4. प्रबल बल

बल का आवेग (Impulse of Force ) Motion

जब कोई बड़ा बल किसी वस्तु पर थोड़े समय के लिए कार्य करता ,है तो बल और समय अंतराल के गुणनफल को उस बल का आवेग कहते है।

आवेग = बल X समय अंतराल = संवेग में परिवर्तन

आवेग वस्तु के संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है।

यह सदिश राशि है।

इसका मात्रक न्यूटन सेकंड (NS ) है।

घर्षण बल (Frictional Force ) Motion

सम्पर्क में रखी दो वस्तुओ के मध्य एक प्रकार का बल कार्य करता है , जो गति करने में वस्तु का विरोध करता है , यही बल घर्षण बल कहलाता है।

इसकी दिशा वस्तु की गति की दिशा के विपरीत होती है।

यह बल तीन प्रकार के होते है –

  1. स्थैतिक घर्षण बल
  2. सर्पी घर्षण बल
  3. लोटनिक घर्षण बल

स्थैतिक बल – जब किसी वस्तु को किसी सतह पर खिसकाने के लिए बल लगाया जाता है और यदि वस्तु अपने स्थान से नहीं खिसके तो इसी बल को स्थैतिक घर्षण बल कहते है।

सर्पी बल – जब किसी सरकने वाली वास्तु और उस सतह के बीच लगने वाले बल को सर्पी घर्षण बल कहते है।

लोटनिक बल – जब एक वस्तु किसी दूसरी वास्तु के सतह पर लुढ़कती है तो दोनों के बीच लगने वाले बल को लोटनिक घर्षण बल कहते है।

घर्षण बल की विशेषता Motion

  • दो सतह के मध्य लगने वाला घर्षण बल उनके संपर्क छेत्रफल पर निर्भर नहीं करता।
  • यह केवल सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है।
  • लोटनिक घर्षण बल का मान सबसे काम होता है।
  • स्थैतिक घर्षण बल का मान सबसे अधिक होता है।
  • घर्षण को कम करने के लिए मशीनों में स्नेहक मिलाया जाता है।
  • Lucent Gk in Motion

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