Virus and Bacteria-विषाणु और जीवाणु -Biology in Hindi

raviraj nag
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विषाणु (Virus )

biology in hindi इसकी खोज रूसी वैज्ञानिक इवानोवस्की ने 1892 में की। 

यह तम्बाकू की पत्ती में मोजैक रोग के कारण किया था। 

लुई पास्चर तथा बीजरिंक ने इन्हे जीवित तरल संक्रामक नाम दिया। तथा एड्स के विषाणु को मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता वायरस नाम दिया 1896 में। (biology in hindi)

वायरस बहुत ही सूक्ष्म ,परजीवी ,अकोशिकीय और विशेष प्रोटीन कण है,जो जीवित शरीर के अंदर जनन करते है ,वायरस को केवल और केवल इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप  मदद से ही देख सकते है। इसके अध्ययन को Virology कहते है। 

Structure of Virus Biology in Hindi

विषाणु की संरचना – यह एक प्रकार से प्रोटीन के आवरण से घिरा हुआ नुक्लिक एसिड होता है जिसके बाहरी आवरण में बहुत सी प्रोटीन इकाई होती है। 

सम्पूर्ण कण को virion कहते है। 

Type of Virus Biology in Hindi

विषाणु के प्रकार – यह तीन 3  प्रकार के होते है। 

Biology GK in Hindi 

  1. पादप वायरस -इसमें  Nuclic acid और RNA होता है जैसे -TMV 
  2. जन्तु वायरस -इसमें Nuclic Acid और DNA होता है जैसे -इन्फ्लुएंजा वायरस ,मम्पस वायरस 
  3. बैक्टेरिओफेज़ (Bacteriophage )-जैसे -टी 2 फेज 

वायरस गुणन (multiplication ) की विधि से ही प्रजनन करते है। 

विषाणु से लाभ

सजीव और निर्जीव दोनों गुण पाए जाते है। 

इसका उपयोग जैव विकास के अध्ययन में किया जाता है। 

इसकी सहायता से जल को खराब होने से बचाया जाता है। 

इसका उपयोग नीले हरे शैवाल को साफ करने में करते है। 

विषाणु से हानि

इससे पौधे में अनेक प्रकार के रोग होते है। 

तम्बाकू की पत्ती में (Tobaco mosaic virus )द्वारा मोज़ेक रोग होता है। 

केले में (Bunchy top of banana ) नामक रोग बनाना वायरस 1 द्वारा होता है। 

खसरा रोग पेरामिक्सो वायरस से बच्चो में होता है। 

पीत ज्वर अरबो वायरस द्वारा होता है। 

इन्फ्लुएंजा आर्थोमिक्सो वायरस द्वारा श्वसन तंत्र का एक गंभीर रोग है। 

रेबीज़ रोग को हाइड्रोफोबिया भी कहते है। 

मनुष्यो के जीवनकाल में गलसुआ रोग केवल एक बार होता है और यह लार ग्रन्थि को प्रभावित करता है। 

मोनेरा जगत biology in hindi

इस जगत में सभी प्रकार के प्रोकेरिओटिक जीवो को रखा गया है। इस जगत के जीव उन सभी जगह पर पाए जाते है जहाँ पर जीवन थोड़ा सा भी सम्भव हो जैसे  की – जल, वायु ,मिट्टी ,रेगिस्तान। 

वर्गीकरण

मोनेरा जगत को सुविधा के अनुसार चार भागो में बाँटा गया है जो इस प्रकार है –

  1. जीवाणु (Bacteria )
  2. एक्टिनोमाइसिटीज़ (Actinomycetes )
  3. आर्किबैक्टीरिया (Archaebacteria )
  4. साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria )

जीवाणु (Bacteria )

यह एककोशिकीय या बहुकोशिकीय ,प्रोकेरिओटिक सूक्ष्म जीव होते है। यह पौधे नहीं होते है कुछ जीवाणु प्रकाश संस्लेशण क्रिया करते है। 

जीवाणु की खोज हॉलैंड के वैज्ञानिक Antony Von Leeuwenhock ने 1683 में किया था। 

इसलिए Leeuwenhock को ही जीवाणु विज्ञानं का पिता (Father of Bacteriology ) कहा जाता है। 

Ehrenberg ने इन्हे जीवाणु नाम दिया 1829 में 

किण्वन (Fermentation ) के बारे में lui पॉस्चर ने ही बताया की यह जीवाणु से होता है। 

रोगो का जर्म मत (Germ Theory of Diseases ) भी लुइ पॉस्चर ने ही बताया। 

जीवाणुओं के विषय में प्रतिरोधी मत लिस्टर ने दिया। 

रोबर्ट कोच ने 1881 में बताया की एंथ्रेक्स रोग ,तपेदिक रोग ,हैजा जैसी बीमारी जीवाणु से ही होती है। 

इसके अध्ययन को Bacteriology कहते है। 

संरचना (Structure ) bology in hindi

इनका पूरा शरीर एक ही कोशिका का बना होता है चारो और एक कोशिका भित्ति पायी जाती है जिसके निचे एक झिल्ली होती है जिसे कोशिका झिल्ली कहते है 

इसका निर्माण प्रोटीन और फॉस्पो लिपिड की बानी होती है। 

जिसके कोशिका द्रव्य में केन्द्रक भित्ति ,क्रोमोसोम ,माइटोकोन्ड्रिया ,अन्तः प्रदव्य जालिका ,तथा अन्य कोशिकांग का आभाव होता है। 

लक्षण – 

  • जीवाणु सरल जीव है। 
  • सभी स्थानों पर पाए जाते है। 
  • इनका आकार 2 -10 µ तक होता है। 
  • कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है। 
  • इसमें केन्द्रक नही होता है। 
  • यह परजीवी ,मृतोप जीवी ,सहजीवी होते है। 
  • जनन विखंडन द्वारा होता है। 

प्रजनन (Reproduction ) biology in hindi

1 अलैंगिक जनन – यह जनन द्वीविभाजन ,कोनिडिया ,अन्तः बीजाणु द्वारा होता है। 

2 लैंगिक जनन – जीवाणुओं में युग्मक और निषेचन का निर्माण नहीं होता है, बल्कि आनुवांशिक पदार्थ का आदान प्रदान होता है जिसे आनुवंशिक पुनर्योजन कहते है जो तीन प्रकार से होता है। 

a – संयुग्मन (Conjugation ) – इसकी खोज लेडरबर्ग तथा टेटम ने 1946 में किया था। 

b – जीन वाहन (Transduction ) -इस विधि की खोज Zinder और Lederberg ने 1952 में की थी। 

c – रूपान्तरण (Transformation ) – ग्रिफिथ ने 1928 में इसकी खोज किया था। 

जीवाणु के लाभ

1 भूमि की उर्वरता जीवाणुओं की मदद से बढ़ा सकते है। राइजोबियम जीवाणु जो दलहनी फसलों की जड़ों में पाया जाता है जो वायुमंडल से नाइट्रोजन लेकर उसको नाइट्रेट बदलने में सहायक होता है, क्यूंकि पौधे वायुमंडल से नाइट्रोजन को सीधे ग्रहण नही करते है। 

लैक्टोबैसिलस जीवाणु दूध में पाया जाने वाले कैसीन नामक प्रोटीन की मदद से दही बनाने में सहायता करता है। 

माइक्रोकोकस कोंडिसेंस जीवाणु द्वारा किण्वन करके चाय की पत्ती को क्युरिंग किया जाता है। 

इसका उपयोग रेशों के रेटिंग में किया जाता है। 

लेक्टिक एसिड के निर्माण में भी जीवाणुओं का उपयोग किया जाता है। 

जीवाणु से हानि biology gk in hindi

Clostridium Botulinium नामक जीवाणु भोजन को जहरीला बना देता है। 

विनाइट्रीकरण करने में। 

पोधो में अनेक प्रकार के रोग होते है। 

जानवरो का काला पैर रोग क्लास्ट्रीडियम चावेई जीवाणु से होता है। 

बैसिलस एन्थ्रिसस जीवाणु से भेड़ में एन्थ्रेक्स रोग होता है। 

 

 रोग का नामजीवाणु
1हैजाविब्रियो कॉलरी
2डिप्थीरियाकोरिनोबक्ट्रीयम डिप्थीरी
3सुजाकगोनोकोकस गोनोराही
4कोढ़माइकोबक्ट्रियम लेप्री
5न्यूमोनिआडिप्लोकोकस न्यूमोनी
6प्लेगबैसिलस पेस्टिस
7सिफलिसट्रेपोनेमा पैलिडम
8टाइफाइडसाल्मोनेला टाइफी
9तपेदिकमाइकोबक्ट्रियम टयूबरकुलोसिस
10टिटनिसक्लॉस्ट्रीडियम टिटनी
11काली खांसीहेमोफिलस पर्टुसिस
biology in hindi

साइनोबैक्टीरिया : नील हरित शैवाल

Blue green Algae भी एक प्रकार का जीवाणु है ,इसे दुनिया का सफलतम जीवधारियों का समूह मन जाता है। 

यह उस सभी जगह पर पाए जाते है जहाँ पर जीवधारी निवास करते है ,जैसे की – जल ,चट्टान मिटटी  आदि। 

इनमे क्लोरोफिल वर्णक पाया जाता है जिसके द्वारा यह अपने भोजन का निर्माण करते है 

लक्षण – 

इसकी कोशिका भित्ति में Selulose पाया जाता है। 

इसमें लैंगिक जनन नहीं होता है, और अलैंगिक जनन एकानीट द्वारा होता है। 

अन्तः प्रदव्य जालिका ,माइटोकोण्ड्रिआ , इनमे नहीं होता। है 

DNA होता है। 

लिनोलिक अम्ल ,गैलक्टोज़ होता है। 

कोशिका विभाजन असूत्री होती है।

जैसे – नॉस्टॉक  

ट्राईकोडेस्टियम एरीथ्रेयम साइनोबैक्ट्रिया के कारण लाल सागर का रंग लाल दिखता है।

biology gk in hindi

प्रोटिस्टा जगत (Biology in Hindi )

इस जगत में वे सभी एककोशिकीय जीव आते है जो जल में रहते है जैसे – मोल्स तथा प्रोटोजोआ। 

इसमें कोशिकाये एक कला membrane द्वारा घिरी रहती है। 

माइटोकोण्ड्रिआ ,गोल्जिकाय ,अन्तः प्रदव्य जालिका ,केन्द्रक ,गुड़सूत्र ,आदि कला से घिरे अंग पाए जाते है। 

इसमें जनन दो प्रकार से होता है –

1 लैंगिक जनन -नर और मादा युग्मक करके zygote बनाते है। 

2 अलैंगिक जनन -द्विविभाजनं द्वारा होता है। 

कवक (Biology GK in Hindi )

कवक हरित लवक नहीं होता है ,यह थेलोफाइटा है। इसके अध्ययन को Mycology कहते है। 

यह हरित लवक नहीं होने के कारण अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते है। 

यह विविधपोषी होते है। 

इनमे भोजन ग्लाइकोजेन के रूप में संगृहीत रहता है। 

कोशिका भित्ति काइटिन की बानी होती है। 

जहाँ जीवित और मृत कार्बनिक पदार्थ होते है वहाँ इनका वास स्थान होता है। 

गोबर पर उगने वाले कवक को Coprophilous Fungi कहते है। 

Keratinophilic कवक नाख़ून  और बालों में उगते है। 

कवक के प्रकार

कवक तीन प्रकार के होते है –

1 सहजीवी (Symbiotic)- जैसे लाइकेन 

2 परजीवी (Parasitic )- जैसे पक्सिनिया ,अस्टिलागो 

3 मृतोपजीवी (Saprophyte )- जैसे राइजोपस ,पेनिसिलियम ,मोरचेलो 

कवक के लाभ

यह कार्बनिक पदार्थो का नाश करते है। 

एगरिकस ,गुच्छी का उपयोग सब्जी के रूप में करते है। 

Aspergillus ,Penicillium का उपयोग पनीर उद्योग होता है। 

ऐलकोहल उद्योग में यीस्ट का उपयोग करते है। 

बेकरी में डबल रोटी बनाने में saccharomyces cervisiae   का उपयोग होता है। 

कवक से anzymes प्राप्त होते है -जैसे 

  • Aspergillus oryzae से Amylase 
  • यीस्ट से इन्वेर्टेज़ 
  • पेनीसीलियम से पैक्टीनेज़ 

कवक से विटामिन का संस्लेशण होता है जैसे –

  • Streptomyces grisicus से विटामिन बी 12 
  • यीस्ट से विटामिन D 
  • असविया गॉसीपी से विटामिन B 2 

औषधियो का निर्माण होता है। 

अलेक्सेंडर फलेम्मिंग ने 1927 में पेनीसीलिन की खोज की थी। 

यीस्ट मृतोपजीवी कवक है यह अपना भोजन नहीं बनाता है क्यूंकि इसमें क्लोरोफिल नहीं होता है।

 

कवक से हानि

यह भोजन को नष्ट कर सकता है। 

कुछ मशरूम खाने योग्य नहीं होते है इनको खाने से मृत्यु भी हो सकती है जैसे -फ़्लोरडिस ,लूसूला ,लेक्टेरियस। 

महत्वपूर्ण तत्य Biology in Hindi

प्रीडीसियस कवक निमेटोड का भक्षण करते है। 

  1. राइजोपस को Bread Mould या Pin Mould 
  2.  ऐस्परजिलस को Blue Mould कहते है। 

LSD (Lysergic acid Diethylamide )

एफ्लाटॉक्सिन पदार्थ जानवरो को हानि पहुंचाते है। 

लाइकेन biology GK in Hindi

लाइकेन कवक और शैवाल से मिलकर बनता है और इनका सम्बन्ध सहजीवी जैसे ही होता है। 

यह थेलोफाइटा वनस्पति है। 

लाइकेन शब्द का प्रयोग सबसे पहले थिओफ्रेस्टस ने किया था। 

इसके अध्ययन को Lichenology कहते है। 

इनमे प्रजनन कायिक ,लैंगिक ,अलैंगिक प्रकार से होता है। 

यह वायु प्रदूषण के संकेतक होते है। लाइकेन नहीं उगते जहा पर वायु प्रदुषण अधिक होता है।

पेड़ की छाल पर उगने वाले लाइकेन – कोर्टीकोल्स

चट्टान पर उगने वाले लाइकेन – सेक्सीकोल्स

biology GK in Hindi
लाइकेन का महत्त्व Biology in Hindi

कुछ लाइकेन नीला रंग देते है जैसे -आर्चिल ,लेकेनोरा। 

लिटमस पेपर मिलता है – रोसेला लाइकेन से। 

लाइकेन का प्रयोग इत्र बनाने में होता है – लोबेरिया ,इरबेनिया ,रेमेनिला। 

परमेलिया सेक्सटिलिस से मिर्गी रोग की दवा बनायीं जाती है। 

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