Work Power and Energy (कार्य,शक्ति और ऊर्जा)

raviraj nag
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work power and energy general knowledge questions in hindi

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Gravitation,work power and energy GK

GK in Work Energy and Power

कार्य (Work )

कार्य की माप लगाए गए बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल के बराबर होती है।

Formula कार्य = बल X बल की दिशा में विस्थापन

Work = Force X Displacement

यह दो सदिश राशियों का गुणनफल है

लेकिन कार्य एक अदिश राशि है।

SI मात्रक = Nm (न्यूटन मीटर )

इसे वैज्ञानिक जेम्स प्रेस्कॉट जूल के सम्मान में जूल (Joule ) कहा जाता है।

इसका संकेत = J है

यदि बल तथा विस्थापन एक ही दिशा में नहीं है तो कार्य –

W = Fs cosθ

शक्ति (Power )

कार्य करने की दर को शक्ति कहते है।

शक्ति P = W/t

SI मात्रक वाट है।

वैज्ञानिक जेम्स वाट के सम्मान में रखा गया है।

इसका संकेत है = W

1 वाट = 1 जूल /सेकंड = 1 न्यूटन मीटर / सेकंड

मशीनों की शक्ति को अश्व शक्ति (Horse Power-HP ) में भी व्यक्त करते है।

1 HP = 746 वाट

वाट सेकंड – यह ऊर्जा या कार्य का मात्रक है।

1 WS = 1 वाट X सेकंड = 1 जूल

वाट घंटा यह भी ऊर्जा या कार्य का मात्रक है।

1 Wh = 3600 जूल

किलोवाट घंटा – यह भी ऊर्जा या कार्य का मात्रक है।

1 KWh = 1000 वाट घंटा

1 KWh = 1000 वाट X 1 घंटा

या 1 KWh = 1000 X 3600 सेकंड

= 3.6 X 106 वाट सेकंड

= 3.6 X 106 जूल

W, KW, MW , HP = शक्ति के मात्रक है।

Ws, Wh, KWh = कार्य अथवा ऊर्जा के मात्रक है।

Work Power and Energy Gk in Hindi

Energy (ऊर्जा)

किसी वस्तु में कार्य करने की छमता को उस वस्तु की ऊर्जा कहते है ,

ऊर्जा एक अदिश राशि है।

इसका SI मात्रक जूल है।

वस्तु में जिस कारण से कार्य करने की छमता आ जाती है , उसे ऊर्जा कहते है।

ऊर्जा के प्रकार (Work Power and Energy)

यह दो प्रकार की होती है –

  1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy )
  2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy )

गतिज ऊर्जा

किसी वस्तु में गति के कारण जो कार्य करने की छमता आ जाती है , उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा कहते है।

यदि m द्रव्यमान की वस्तु v वेग से चल रही है तो गतिज ऊर्जा –

K.E. = mv2 /2

अर्थात यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान 2 गुना करने पर उसकी गतिज ऊर्जा 2 गुनी हो जाएगी।

और द्रव्यमान आधी करने पर उसकी गतिज ऊर्जा आधी हो जाएगी।

गतिज ऊर्जा एवं संवेग में संबंध

K.E. = P2 /2m

जहाँ P = संवेग = mv

अर्थात संवेग 2 गुना करने पर गतिज ऊर्जा 4 गुणी हो जाएगी।

Work Power and Energy Gk in Hindi

स्थितिज ऊर्जा

किसी वस्तु में उसकी अवस्था या स्थिति के कारण कार्य करने की छमता को स्थितिज ऊर्जा कहते है।

जैसे –

  • बाँध बना कर इक्कठा किये गए पानी की ऊर्जा।
  • घडी की चाभी में संचित ऊर्जा।
  • तानी हुई स्प्रिंग या कमानी की ऊर्जा।

गुरुत्व बल के विरुद्ध संचित स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक –

P.E. = mgh

जहाँ m = द्रव्यमान , g = गुरुत्वजनित त्वरण , h = ऊंचाई

ऊर्जा संरक्षण का नियम

ऊर्जा का न तो निर्माण होता है न विनाश अर्थात विश्व की कुल ऊर्जा नियत रहती है।

इसका केवल एक रूप से दूसरे रूप में स्थांतरण होता है।

जब भी ऊर्जा किसी रूप में लुप्त होती है ,ठीक उतनी ही ऊर्जा अन्य रूपों में प्रकट होती है

ऊर्जा का रूपांतरण

उपकरण ऊर्जा का रूपांतरण
डायनेमो यांत्रिक ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में
सौरसेल प्रकाश ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में
माइक्रो फ़ोन ध्वनि ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में
विधुत मोटर विधुत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में
लाउड स्पीकर विधुत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में
सितार यांत्रिक ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में
ट्यूब लाइट / बल्ब विधुत ऊर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में
मोम बत्ती का जलना रासायनिक ऊर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में
कोयले का जलना रासायनिक ऊर्जा को ऊष्मा ऊर्जा में
इंजन ऊष्मा ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में
विधुत सैल रासायनिक ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में
प्रकाश विधुत सेल प्रकाश ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में
Work Power and Energy

Work Power and Energy Gk

गुरुत्वाकर्षण

चार मौलिक बलों में गुरुत्वाकर्षण एक कमजोर बल है।

इसे न्यूटन ने अपनी पुस्तक प्रिन्सिपिया में प्रकाशित किया था।

किसी दो पिंडो के मध्य कार्य करने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके मध्य की दूरी के वर्ग के वियुत्क्रमानुपाती होता है।

माना की m1, m2 दो द्रव्यमान है और उनके बीच की दूरी r है तो आकर्षण बल होगा –

F ∝ m1m2

F ∝ 1/r2

तो F = Gm1m2 / r2

जहाँ G एक नियतांक है इसका मान

G = 6.67 X 10-11 Nm2/kg2

Work Power and Energy , Gravitational GK in Hindi

गुरुत्वीय त्वरण g एवं गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक G में संबंध

माना की पृथ्वी का द्रव्यमान Me तथा त्रिज्या Re है

और वस्तु का द्रव्यमान m है।

F = GMem / Re2 —— (1)

F = mg ——- (2)

समीकरण 1 एवं 2 से

mg = GMem / Re2

g =GMe / Re2

गुरुत्वजनित त्वरण g के मान में परिवर्तन

45 डिग्री अक्षांश तथा समुद्र तल पर g का मान 9.8 m/s होता है।

पृथ्वी तल पर g का मान न्यूनतम भूमध्य रेखा पर होता है।

तथा अधिकतम ध्रुवो पर होता है।

यदि पृथ्वी अपनी अक्ष के परितः घूमना बंद कर दे तो प्रेत्यक स्थान पर g के मान में वृद्धि हो जाएगी।

पृथ्वी अपनी अक्ष के परितः वर्तमान गति से 17 गुना अधिक गति से घूमने लगे तो भूमध्य रेखा पर रखी वस्तु का भार भी शून्य हो जायेगा।

अर्थात पृथ्वी के घूर्णन गति घटने पर g का मान बढ़ता है , और घूर्णन गति बढ़ने पर g का मान घटता है।

पृथ्वी तल से ऊपर या निचे जाने पर g का मान घटता है।

लिफ्ट में व्यक्ति का भार

जब लिफ्ट त्वरण a से ऊपर जाता है तो लिफ्ट में व्यक्ति का भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है।

लिफ्ट त्वरण a से नीचे आती है तो लिफ्ट में व्यक्ति का भार घटा हुआ प्रतीत होता है।

लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे जाती है तो व्यक्ति के भार में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

नीचे आते वक्त लिफ्ट की डोरी टूट जाये तो वह मुक्त वस्तु की भांति नीचे गिरेगा।

उपग्रह का अभिकेंद्रिय बल = गुरत्वाकर्षण बल

mv02 / r = GMem / r2

r = Re + h जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या तथा h = पृथ्वी ताल से उपग्रह की ऊंचाई

पलायन वेग (work Power and Energy GK )

पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है , जिससे किसी वास्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर की और फेंके जाने पर वह गुरुत्वीय छेत्र को पार कर जाती है , पृथ्वी पर वापस नहीं आती है।

उपग्रह के अंदर प्रेत्यक वस्तु भारहीनता में होती है ।

लेकिन चन्द्रमा में भारहीनता नहीं है।

चन्द्रमा में g का मान पृथ्वी के g का 1/6 गुणा होता है।

Work Power and Energy Gk in Hindi

केप्लेर का नियम

प्रेत्यक गृह सूर्य के चारो और दीर्घवृताकार कक्षा में परिक्रमा करता है तथा सूर्य गृह की कक्षा के एक फोकस बिंदु पर स्थित है।

प्रेत्यक गृह का छेत्रीय नियत रहता है। इसका प्रभाव यह होता है की जब ग्रह सूर्य के निकट होता है ,तो उसका वेग बढ़ जाता है और जब वह दुर होता है तो उसका वेग कम हो जाता है।

सूर्य के चारो और ग्रह एक चक्कर जितने समय में लगाता है , उसे उसका परिक्रमण काल (T) कहते है।

परिक्रमण काल का वर्ग ग्रह की सूर्य से औसत दूरी r के घन के अनुक्रमानुपाती होता है ,

अर्थात, T2 ∝ r3 

सूर्य से अधिक दुर के ग्रहों का परिक्रमण काल भी अधिक होता है

उदहारण –

  • सूर्य के निकट बुध का परिक्रमण काल 88 दिन का होता है।
  • दूर का ग्रह वरूण का परिक्रमण काल 165 वर्ष होता है।

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